Wednesday, April 13, 2005

कविताएँ

  • ईश्वर तो नहीं हो...?

कोसो दूर हो
तुम मुझसे
पर यूँ लगता है
हमेशा साथ हो तुम मेरे
दिल की हर धड़कन
जपती है तुम्हारा ही नाम
लोग कहते हैं
ईश्वर हमेशा साथ रहता है
वैसे ही
तुम भी
हर पल, हर घड़ी
साथ हो मेरे
कहीं
तुम ईश्वर तो नहीं?
***

  • दूरी के बाद भी
तू भी कम्प्यूटर
मैं भी कम्प्यूटर
ईश्वर एक उपगृह है
जिसने जोड़ रखा है
तुम्हें और मुझे
सैकड़ों मील की दूरी के बाद भी
बिना किसी तार के !

***


  • खुशबू
तुमने कहा
क्या खुशबू लाये हो ?
कहीं ये खुशबू
तुम्हारी खुद की तो नहीं
जिसका होता है एहसास
तुम्हें
मेरे आने के साथ !
***

-महेश मूलचंदानी

2 comments:

Raman said...

हिन्दी ब्लाग के लिये बहुत बहुत बधाईयां. "कुत्ते की पूँछ" क्या आपकी किसी पुस्तक का नाम है?

deeptrivia said...

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